दोस्तों जिस तरह से आज भोजन, पानी, कपड़ा, मकान इन सब की आवश्यकता होती है। उसी तरीके से खराब होती पर्यावरण की वजह से दवाइयां भी इस लिस्ट में शामिल हो गई है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति इस दुनिया में हो जिसने कभी भी अपने जीवन समय में दवाइयां ना खाई हो। दवाइयों का मार्केट अपने आप में एक बहुत बड़ा मार्केट है, मैन्युफैक्चर से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर तक और डिस्ट्रीब्यूटर से लेकर रिटेलर तक सभी जगह कमिशन भी अच्छा रहता है। भारत जैसे देश में जहां दवाइयों का डिस्ट्रीब्यूशन अस्थाई रूप से हो रहा है वहीं पर दो दोस्तों ने मिलकर अपने स्टार्टअप के माध्यम से दवाइयों के डिसटीब्यूशन की अस्थाई माध्यम को स्थाई माध्यम में बदल दिया है।  

Medicento Startup Success Story in Hindi.

Medicento Startup Success Story in Hindi. हम बात कर रहे हैं उड़ीसा के रहने वाले अर्पण देवाशीष Arpan Debasis की। जिन्हें अपनी नौकरी के दौरान ही यह महसूस होने लगा कि उन्हें खुद का व्यवसाय करना है वह किसी के दबाव में रहकर काम नहीं कर सकते। इस मौके की तलाश कर ही रहे थे कि अचानक उनकी पिता की मृत्यु एक लंबी बीमारी के चलते सन 2011 में हो गई। जिससे वे काफी दुखी हुए तब उन्होंने पूरे देश में मेडिकल के क्षेत्र में सकारात्मक काम करने के बारे में सोचा। मेडिकल की सुविधा के अभाव से कभी भी कोई अन्य व्यक्ति अपने प्रिय जन की मृत्यु को ना देखे।

Medicento Startup success story in hindi

शैक्षिक योग्यता

उड़ीसा के रखने वाले अर्पण देबाशीष ने बेंगलुरु के एमएसआरआईटी “MSRIT”से केमिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा की है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गोवा और यूईए में ज़ुआरी फ़र्टिलाइज़र्स ऐंड केमिकलर्स लि. के लिए नौकरी की। उसके बाद उन्होंने कारों की एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस  में सेल्स हेड के तौर पर भी नौकरी की और उसी दौरान उनके मन में अपना खुद का काम शुरू करने की इच्छा हुई। तब अर्पण ने अपनी इच्छा को हकीकत में तब्दील करने के लिए अपने दोस्त राहुल को अपना बिजनेस आइडिया बताया और उससे मदद मांगी। राहुल ने कम्प्यूटर साइंस से ग्रेजुएशन की थी और डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में जॉब कर रहे थे। उन्होने जब देबाशीष का आइडिया सुना तो उनका आइडिया वाकई लाजबाव था, उनके आइडिया मे उन्होंने ग्राहक और रिटेलर्स को आपस में जोड़ दिया जिन्हे दवाइयों की जरूरत होती थी।

मिलकर शुरू किया Startup.

वर्तमान समय में 29 वर्षीय अर्पण देबाशीष और 28 वर्षीय उनके दोस्त राहुल दोनों ने मिलकर अपना स्टार्टअप मेडिसेन्टो Medicento” के नाम से शुरू किया और बहुत ही अच्छी तरह चला रहे हैं। जो ग्राहक की जरूरत के मुताबिक फ़ार्मा स्टोर्स तक मेडिसिन्स इत्यादि पहुंचाने का काम कर रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें अर्पण और उनके दोस्त का यह स्टार्टअप रीटेलर्स के लिए दवाइयों की इन्वेंटरी (स्टॉक) का भी प्रबंध करता है। Medicento success story in hindi.

स्टार्टअप मे निवेश।

अर्पण ने अपने दोस्त राहुल के साथ मिलकर सन 2015 में Medicento Startup 20 लाख रुपए के निवेश के साथ शुरू किया। अर्पण ने अपने स्टार्टअप मेडिसेन्टो की टीम बनाने के लिए अपने पुराने मित्रों को भी इसमे शामिल कर लिया। मेडिसेन्टो में को-फ़ाउंडर के तौर पर, सन 2018 मे गितेश शास्त्री जो की अपनी इंजीनियरिंग की फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहे थे उन्होने मेडिसेंटो को जॉइन किया। success story in hindi.

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मेडिसेन्टो की शुरुआत।

बता दें कि अर्पण ने अपना मेडिसेन्टो को बीटूसी (Business to Consumer) मॉडल के मुताबिक शुरू किया था। जिसमें यूसर के द्वारा डॉक्टर का प्रेसक्रिप्शन Whatsapp के जरिये मेडिसेन्टो को भेज दिया जाता हैं। मेडिसेन्टो प्रेसक्रिप्शन भेजने वाले के पते पर दवाइयों को तीन घंटे के अंदर ही डिलिवर कर देता है। इसके अलावा मेडिसेन्टो रीटेलर्स के साथ मिलकर ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक दवाइयां खरीदने पर 10% तक का डिस्काउंट भी देता है।

स्टार्टअप के प्रमोशन के लिए।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अर्पण ने अपने स्टार्टअप के शुरूवात मे वे मरीजों से बातचीत करने के लिए अस्पताल जाया करते थे, क्योंकि किसी भी अस्पताल में मरीजों को दवाइयों पर किसी भी तरह की छूट नहीं मिल पाती थी। अर्पण अपने पिछले दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि वे संभावित मरीजों से, खासतौर से वृद्ध लोगों से बातचीत करने के लिए रेस्ट्रॉन्ट और मंदिरों में भी जाया करते थे। उन्होंने मेडिसेन्टो के पोस्टर भी अपनी टीम के साथ मिलकर अस्पतालों के बाहर दीवारों में लगवाए।

कई परेशानियों का किया सामना।

उनको अपने स्टार्टअप के प्रमोशन करने के लिए कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ा यहां तक कि उनको ज़बरदस्ती के साथ कई अस्पतालों से बाहर भी निकाल दिया गया। बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप होने की वजह से मेडिसेन्टो के पास सीमित संसाधन ही थे, जिसकी वजह से मेडिसेन्टो स्टार्टअप को शुरू करने के बाद से दवाइयों की डिलिवरी स्वयं अर्पण को ही करनी पड़ती थी। कई बार अर्पण अपने स्टार्टअप का प्रमोटेड करने के लिए डोर टू डोर अपार्टमेंटों में भी जाने लगे और एक समय ऐसा भी आया की उन्हे अपार्टमेंट में आने से प्रतिबन्ध कर दिया।

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 स्टार्टअप को चलाये रखने के लिए।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अर्पण ने अपने स्टार्टअप को चलाये रखने के लिए काफी परेशानियों का सामना किया रुपयो की तंगी की वजह से उन्होने बच्चों को ट्यूशन्स पढ़ाकर अपने स्टार्टअप के लिए फ़ंड की व्यवस्था की। अर्पण ने बताया कि अधिकतर निवेशक फ़ार्मा सेक्टर के क्षेत्र में निवेश करने लगे थे परन्तु फिर भी उनके स्टार्टअप के लिए कोई निवेशकों ने इन्टरेस्ट नहीं दिखाया। अर्पण का कहना है की सभी निवेशक उनके स्टार्टअप को ना चलने वाला स्टार्टअप बता रहे थे। एक निवेशक ने उनसे कहा था की आपके स्टार्टअप मे कोई भी प्रॉडक्ट नहीं है और आपको नयी तकनीक की भी जरूरत है।

मेडिसेन्टो के मॉडल को बदला।

अर्पण के मुताबिक, मेडिकल स्टोर में दवाइयों के स्टॉक को पूरा भरने के लिए कम से कम 7 या 8 डिस्ट्रीब्यूटर की आवश्यकता रहती है। यदि किसी वजह से उनके डिस्ट्रीब्यूटर के पास भी दवाइयों का स्टॉक कम होने लगता है या फिर खत्म हो जाता है, तब ऐसी परिस्थिति में मेडिकल स्टोर से कस्टमर लौटने से डाइरैक्ट नुकसान होने लगता था। उन्होंने बताया कि ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए रीटेलर्स में दवाइयों को समय पर डिलीवर करने के लिए मजबूत सप्लायर की जरूरत थी। तब अर्पण ने अपने स्टार्टअप में बीटूसी (Business to Consumer) की जगह बीटूबी (Business to Business) के मॉडल पर आधार पर काम करना शुरू कर दिया।

कंपनी के लिए बनाया एप्लीकेशन।

अर्पण के मुताबिक उनके स्टार्टअप मे बड़े डिस्ट्रीब्यूटरों ने कुछ खास ध्यान नहीं दिया क्योंकि उन्हें मेडिसेन्टो की वजह से मात्र 20,000/-रूपये का ही फायदा होता वहीं रीटेलर्स की मदद से डिस्ट्रीब्यूटरों को 1 करोड़ या उससे भी अधिक का फायदा होता था। तब अर्पण ने तय कर लिया कि वे अपने स्टार्टअप के लिए केवल छोटे डिस्ट्रीब्यूटर के साथ ही मिलकर काम करेंगे। इसके लिए उन्होंने अपने स्टार्टअप के लिए एक एप्लीकेशन भी तैयार कारवाई। जिसके जरिये उन्होंने विभिन्न फ़ार्मा स्टोर्स के डाटा को कलेक्ट करना शुरू कर दिया। साथ ही रिटेलर्स को भी केवल अपने इन्वेंटरी (स्टॉक) को एप्लीकेशन मे अपडेटेड करना होता है। Medicento success story in hindi.

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दवाइयां बनाने वाली मैन्युफैक्चर कंपनी को केवल सेल से संबंधित डाटा ही दिखाया जाता था न कि ग्राहकों के द्वारा इस्तेमाल करने का डाटा। तब अर्पण ने अपनी स्टार्टअप कंपनी के जरिये रिटेलर्स और मैनुफ़ैक्चर के बीच की इस खाई को भरने का काम किया।

कंपनी मेडिसेन्टो की कमाई।

अर्पण ने बताया कि उनके मेडिसेन्टो के स्टार्टअप का रेवेन्यू डिस्ट्रीब्यूटरों से प्राप्त कमीशन फीस के रूप में आता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अर्पण ने मेडिसेन्टो के माध्यम से केवल अपना 7% तक का मार्जिन निकालकर रीटेलर्स को बेचने के लिए अच्छा मुनाफ़ा दे रहे हैं। अर्पण ने ये भी बताया कि उनकी कंपनी मेडिसेन्टो को अब तक करीब 20,000 से ज्यादा ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं। जिनमे से ज़्यादातर ऑर्डर 2,500 रुपये से अधिक के है। बता दें कि मेडिसेन्टो स्टार्टअप की कमाई हर महीने 2 लाख से अधिक की हो रही है।

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कंपनी का लक्ष्य।

उन्होंने अपनी मेडिसेन्टो कंपनी के लक्ष्य के बारे में बताते हुए कहा कि वे महीने की 2 लाख रूपये की आमदनी से बढ़ाकर 10 लाख रूपये की आमदनी एक दिन में अर्जित करना है। इसके अलावा वे अपनी कंपनी को आने वाले कुछ वर्षो में भारत के चार बड़े शहरों में बढ़ाने के लिए प्रयत्न करने में लगे हुए है।

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अर्पण ने बताया कि वे अपने स्टार्टअप के लिए रेवेन्यू बढ़ाने के लिए काफी जोरदार तरीके से रणनीति बनाई है। जैसे कि फ़ार्मा स्टोर्स के लिए जरूरी ईआरपी सिस्टम को बेचना और दवाइयां बनाने वाली मैन्युफैक्चर को ग्राहकों के द्वारा इस्तेमाल की जा रही दवाइयों का सही डाटा उपलब्ध कराने के लिए फीस की व्यवस्था करना। अर्पण के अनुसार जल्द ही कंपनी की ऐप पर ऐडवर्टिज़मेंट करने और वेयरहाउस की जगह शेयर करने के द्वारा भी कंपनी अपने रेवेन्यू को बढ़ाने की तैयारी कर रही है। मेडिसेन्टो कंपनी अपनी फंडिंग  को बढ़ाने के लिए वीसी लेवल फ़ंडिंग को हासिल करने की तैयारी मे है।

मेडिसेन्टो कंपनी का नेटवर्क।

अर्पण ने बताया कि मेडिसेन्टो स्टार्टअप में अभी एक कोर टीम भी काम कर रही है। जिनमे मुख्यत 8 लोगों की टीम है। ग्राहकों तक दवाइयां डिलीवर करने के लिए उन्होने  किराए में बाइक ली है। अर्पण की कंपनी में प्रत्येक दिन में दो-दो शिफ़्ट में काम किया जाता है जिसमें दवाइयों को फ़ार्मा स्टोर्स तक डिलीवर करने का काम है। जल्द ही अर्पण अपने मेडिसेन्टो स्टार्टअप के माध्यम से फ़ार्मा स्टोर के साथ मिलकर एक फाउंडेशन के निर्माण में कोशिश कर रहे है। अर्पण बताते हैं कि जब उनकी मेडिसेन्टो कंपनी में रीटेलर्स का नेटवर्क एक हजार से ज्यादा हो जाएगा, तब वे सभी बड़े ब्रांड से सीधे पहुँच बना सकेंगे। अभी हाल ही में उनकी कंपनी में 300 फ़ार्मा स्टोर्स का नेटवर्क है, जिसकी वजह से कंपनी में लगभग औसतन 3 हज़ार मासिक ऑर्डर प्राप्त हो जाते हैं। Medicento success story in hindi.

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भविष्य के लिए कंपनी की योजनाएं।

फिलहाल मेडिसेन्टो कंपनी के द्वारा कुछ बड़े ब्रांडों जैसे सिपला और अबॉट के द्वारा पेटेंट की जा चुकी दवाइयां की सप्लाई मार्केट में कर रहे हैं। कंपनी ने अभी तक जेनेरिक मेडिसिन की ओर ध्यान नहीं दिया परंतु जल्द ही वह जेनेरिक मेडिसिन की सप्लाई के लिए योजना बना रहे हैं। कंपनी के अनुसार पेटेंट की दवाइयां की डिमांड हमेशा मार्केट में बनी रहती है जिसकी वजह से कंपनी के साथ रिटेलर हमेशा जुड़ा रहता है। कंपनी की ग्रोथ के लिए मेडिसेन्टो ने आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के साथ भी साझेदारी कर ली है कंपनी की एक टीम हमेशा इस बात का ख्याल रखती है की कंपनी की ग्रोथ किसी भी तरह से कम ना हो और मार्केटिंग स्ट्रेटजी पर अधिक कार्य कर सकें। आने वाले लक्ष्य का उद्देश्य काफी बड़ा है जल्द ही अपनी मेहनत के साथ यह लोग अपने लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे।

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