दोस्तों आज के समय मे गाड़ी, कार का होना चाहे वह डीजल की हो या पेट्रोल की पर्यावरण को दूषित कर रही है। तकनीकी के इस दौर मे ईको-फ़्रेंडली व्हीकल सोल्यूशंस समय की मांग है। कुछ सालो पहले से इलेक्ट्रिक व्हीकल का केवल जिक्र ही हुआ करता था परंतु अब धीरे धीरे कई बड़ी कंपनी अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट मे उतार रही है। जिनमे आज ई-रिक्शा, ई-स्कूटर काफी कॉमन हो गया है। सभी इलेक्ट्रिक व्हीकल मे बैटरी का इस्तेमाल एक कॉमन फ़ैक्टर होगा। अभी जो इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट मे चल रहे है उनमे सबसे बड़ी परेशानी बैटरी को चार्ज करने में लगने वाला समय है। इस परेशानी को कम करने के लिए मुंबई के दो शख्सों ने मिलकर एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया है जिसमें वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरी को मात्र 15 मिनट में चार्ज किया जा सकता है।

इस स्टार्टअप ने तैयार की सस्ती व मात्र 15 मिनट मे फुलचार्ज इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल बैटरी।

जी हाँ दोस्तों, हम बात कर रहे हैं, मुंबई के गीगाडाइन एनर्जी “Gegadyne Energy के संस्थापक एवं CEO जुबिन वर्गीज और अमेया गाड़ीवान की जिन्होंने दावा किया है की वाहनों के लिए जो बैटरी उन्होने अपनी टीम के साथ मिलकर बनाई है, उस बैटरी को मात्र 15 मिनट मे ही फुल चार्ज करके वाहन मे इस्तेमाल किया जा सकता है। Gegadyne Energy Startup के मुताबिक इस तरह की बैटरी के आ जाने पर आम लोगों का बजट काफी बचेगा और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री मे एक नई क्रांति आ जाएगी।

तो बात करते हैं गीगाडाइन एनर्जी के CEO जुबिन वर्गीज और अमेया गाड़ीवान जी से जिन्होंने इस तरह की बैटरी बनाकर जो इलेक्ट्रिक व्हीकल का भविष्य काफी उज्जवलित किया है।  

कंपनी की शुरुआत।

Gegadyne Energy के संस्थापक जुबिन और अमेया दोनों ने मिलकर अपनी मेकाट्रॉनिक्स  इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही सन 2014 में अपने गीगाडाइन के कान्सैप्ट पर काम करने की शुरुआत कर दी थी। उन्हें यह प्रेरणा टेस्ला कंपनी की दो गाड़ियां एक मॉडल एक्स और दूसरी मॉडल मॉडल एस कारो के लांच हो जाने के बाद मिली। ज़ुबिन को शुरुवात से ही कारों में जबकि अमेया को तकनीकी में रुचि थी और इसी हुनर को उन्होंने अपने प्रॉफ़ेशन मे बदलने का प्लान बनाया और अपनी योजना के मुताबिक दोनों ने मिलकर एनएमआईएमएस NMIMS के अंत में एक फ़ाइनल प्रोजेक्ट के तौर पर उन्होने साथ में मिलकर एक ईवी (इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल) मॉडल बनाने का निर्णय किया।

अपने इस प्रोजेक्ट में ईवी (इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल) तैयार करने के लिए उन्हे जिस तरह की बैटरी की जरूरत थी उसके लिए दोनों ने मिलकर मुंबई के कबाड़ी बाजार में घूम रहे थे लेकिन उन्हे जब इस बात की जानकारी हुई कि वे जिस तरह की बैटरी के लिए कबाड़ी बाजार में घूम रहे थे, उसकी लागत गाड़ी को पूरा बनाने में आने वाली कुल लागत से तीन गुना अधिक की थी। यह जानकर उनके दिमाग मे भविष्य का एक बेहतर बिजनेस आइडिया आया जो जल्द ही इनको करोड़पति की लिस्ट मे शामिल करवा सकता था। दोनों ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई खत्म कर सन 2015 मे Gegadyne Energy का Startup शुरू किया।

किस तरह की बैटरी पर किया शोध।

Gegadyne Energy के संस्थापक जुबिन और अमेया के मुताबिक उन्होंने सबसे पहले एक सस्ती बैटरी लेड-ऐसिज से शुरू की जो बहुत देर से चार्ज होती थी। उसके बाद उन्होंने अपने शोध में लीथियम-आयन बैटरी को लिया जो अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल मे ही इस्तेमाल होती थी। जिसकी कुछ अच्छी खासियत थी की वह जल्द चार्ज हो जाती थी और आसानी से ईवी (इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल) मे उपयोग मे ली जा सकती थी परंतु इसके साथ एक बड़ी समस्या ये थी की इसे बार बार चार्ज करना पड़ना था और बार बार चार्ज करने पर इसकी लाइफ पर काफी असर पड़ता था और कम समय मे इसे बदलना भी पड़ता था।

बढ़ाया जा सकता है बैटरी की क्षमता को।

Gegadyne Energy के संस्थापक फ़ाउंडर के मुताबिक उन्होने लेड-ऐसिज बैटरी और लीथियम-आयन बैटरी पर शोध किया परंतु उन्हे यहा सफलता हासिल नहीं हुई। इन सभी शोधो के बाद उन्होंने सुपरकैपेसिटर्स की एक बैटरी पर काम करना शुरू किया जो कि मार्किट में पहले से ही डिमांड मे थी। इस बैटरी में भी चार्जिंग की क्षमता और बैटरी को चलने में लगने वाला समय लम्बा होता था, परन्तु इस बैटरी में भी बहुत सारी समस्या आती थी। जैसे इनमे ज्यादा एनर्जी को इकठ्ठा नहीं किया जा सकता था। यानि की बैटरी की डेन्सिटी एनर्जी काफी कम थी। इसके अलावा इस बैटरी का सेल्फ़-डिस्चार्ज रेट भी बहुत ज्यादा था। यानि की बैटरी पर बाहरी लोड के ना होने पर बैटरी अपने आप डिस्चार्ज होने लगती थी।   

सुपरकैपेसिटर्स बैटरी पर किए बदलाव।

जुबीन और अमेय दोनों ने मिलकर विचार किया कि वे इस तरह की बैटरियों में आने वाली समस्याओं का निपटारा करने के लिए सुपरकैपेसिटर्स बैटरी मे ही बदलाव करेंगे। वह जानते थे की आज की जरूरत क्या है और बैटरी पर लगातार होते खर्चे मे हर कोई परेशान है। हर व्यकित को एक अच्छी और लंबे समय तक चलने वाली बैटरी की ही जरूरत है। हम सभी ने ये फ़ैसला किया की हम आसानी से मिल सकने वाले प्रकृति मटीरियल्स का उपयोग करते हुए एक बेहतर बैटरी को तैयार करेंगे और इन सभी मे सबसे सभी बात यही थी की हमे कोई नहीं तकनीक नहीं बनानी थी बस पुरानी तकनीक मे बदलाव यानि की सुपरकैपेसिटर्स बैटरी मे ही परिवर्तन करने थे।   

उन्होंने सुपरकैपेसिटर्स में सुधार करने के लिए ग्रैफीन, कम्पोज़िट नैनोमटीरियल्स और आर्टिफ़िशियल ऐटम्स को मिला दिया जिससे कि सुपरकैपेसिटर्स बैटरी बेहतर काम करे। जिसकी वजह से बैटरी का सेल्फ़-डिस्चार्ज रेट काफी कम होने लगा और एनर्जी डेन्सिटी मे भी काफी अच्छे परिवर्तन आए।

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कम समय पर चार्ज होने वाली बैटरी।

फ़ाउंडर जुबीन के मुताबिक उन्होंने जिस तकनीक का उपयोग करते हुए सुपरकैपेसिटर्स की बैटरी मे बदलाव किए है उसकी बदौलत बैटरी चार्ज होने में मात्र 15 मिनट का ही समय लगता है। इस तकनीक की वजह से बैटरी सस्ती, हल्की और पर्यावरण के लिए अच्छी, ईको-फ़्रेडली होती है। इसके अलावा आज के समय में इस्तेमाल की जाने वाली लीथियम-आयन बैटरीज़ के मुकाबले उनकी तकनीकी से बनी सुपरकैपेसिटर्स की बैटरी की परफॉरमेंस 50 गुना ज्यादा कार्य करने में सक्षम है।

कंपनी के मुताबिक वे ईवी (इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल) में बैटरीज़ के अलावा कई अन्य एनर्जी ईको-सिस्टम प्रोडक्ट्स और सर्विसेज़ भी अपने कस्टमर को देती है। जिसमें सेल्स, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और बैटरी पैक्स सिस्टम आदि सम्मलित है।

पेटेंट के लिए दिया आवेदन।

मुंबई के Gegadyne Energy Startup ने अपने बनाये हुए प्रोडक्ट के लिए अंतर्राष्ट्रीय पेटेन्ट्स के लिए आवेदन किया है। जिसकी सहमति अभी नहीं मिली है। कंपनी के मुताबिक वे भारत में पहली सुपरकैपेसिटर्स बैटरी बनाने के लिए अपना एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट खड़ा करने की योजना मे है। इसके अलावा वे इस तरह की बैटरी बनाना चाहते हैं जो न केवल गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सके बल्कि अन्य कंस्यूमर प्रॉडक्ट मे उपयोग मे ली जा सके। जैसे लैपटाप, मोबाइल बैटरी व अन्य गेजेट्स बैटरी।

कंपनी की बड़ी योजना।

कंपनी आने वाले भविष्य के लिए काफी बड़ी योजनाओ पर कार्य कर रही है। इनकी योजनाओ मे सोलर ग्रिड के साथ मिलकर अपनी अधिक कार्य क्षमता वाली बैटरी को सोलर योजनाओंटेलिकॉम सैक्टर मे सम्मलित करने के लिए एक ब्लू प्रिंट पर काम कर रही है जल्द ही हम ऐसे भविष्य मे होंगे जिसमे हमे आधुनिक तकनीक का सही उपयोग होते देखेंगे।       

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फंडिंग के लिए की व्यवस्था।

Gegadyne Energy startup ने सन 2018 के शुरुआती दौर में अघोषित तौर पर मुंबई के ऐंजल फंडिंग नेटवर्क से सीड फ़ंडिंग हासिल की। उन्होंने इस फ़ंड का इस्तेमाल मुंबई में ही लैब्स, ऑफिस डेवलपमेंट्स फैसिलिटी को बनाने में और अपनी रिसर्च मे इन्वेस्ट की है। सन 2020 तक कंपनी अपने प्रोडक्ट को ऑफिसियल, कमर्शियल के तौर पर सभी आम पब्लिक के लिए लॉंच करने की योजना बना रही है।

फोर्ब्स ने अपनी पत्रिका में किया शामिल।

फोर्ब्स ने पिछले महीने गीगाडाइन एनर्जी के फाउंडर्स जुबिन और अमेया दोनों को अपनी पत्रिका में अंडकर 30 लिस्ट में शामिल किया है। आज उनकी कंपनी में मटीरियल साइंस और एनर्जी स्टोरेज के अपने क्षेत्र में पांच विशेषज्ञ पीएचडी वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं की एक काबिल टीम है। कंपनी अपने वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं के साथ मिलकर अपने तकनीकी प्रॉडक्ट, बैटरी को एक इलेक्ट्रिक स्कूटर मे सफल परीक्षण कर चुके है।

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दोस्तों आज Gegadyne Energy startup के फाउंडर्स जुबिन और अमेया के द्वारा इस बिजनेस आइडिया पर अपनी मेहनत करते हुए सफल परीक्षण के साथ आने वाला भविष्य लिखने को तैयार है। आने-वाले समय में बहुत जल्द इलेक्ट्रिक गाड़ियां सभी आम पब्लिक के पास आसानी से उपलब्ध होंगी और साथ ही पर्यावरण को होने वाले खतरो से भी निजाद मिलेगी।


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