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5 रुपये दहाड़ी पर किया काम, आज अमेरिका मे 100 करोड़ टर्नओवर की कंपनी।

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यदि मन में भी कुछ कर दिखलाने का जोश एवं जूनून हो तो हम सभी अपने-अपने सपने को पूरा करने में कामयाब हो सकते हैं जैसा कि एक महिला ने अपने खराब हालतों पर जीत हासिल कर हम सभी को ये साबित कर दिया की इंसान चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकता है। जमीन से आकाश तक का सफर मे इन्होने अपनी पूरी जिंदगी लगा दी और आज पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल के रूप मे खड़ी है।

5 रुपये दहाड़ी पर किया काम, आज अमेरिका मे 100 करोड़ टर्नओवर की कंपनी। Jyothi Reddy success story.

आज हम उस महिला के बारे में चर्चा करेंगे जिनका बचपन का समय काफी मुश्किलों और कठिनाइयों से भरा हुआ है। तो चलिए बात करते हैं दक्षिण भारत के तेलंगाना की रहने वाली एक आम घरेलू महिला ज्योती रेड्डी Jyothi Reddy जिन्होने अपने बचपन से लेकर अपनी शादी के बाद भी वो दिन देखे जब उन्हे दो जून की रोटी के भी लाले थे। घर चलाने के लिए एक-एक रुपये को मोहताज थी परंतु अंदर हिम्मत थी की चाहे कुछ भी हो जाये हार नहीं माननी। Success Story.

समय बदला और आज उन्होने वो मुकाम हासिल कर लिया कर जिसका सपना हर कोई देखता है। गाँव मे रोजी रोटी को मोहताज ज्योती रेड्डी आज अमेरिका मे अपनी “की सॉफ्टवेयर सॉल्युशंस इंक” “Key Software Solutions Inc.” कंपनी की सीईओ है। आइये जानते है की कैसे उन्होने अपने जीवन मे इतना बड़ा परिवर्तन किया और किन किन परिस्थियों को सामना करते हुए अपने लक्ष्य की और बढ़ती रही।

गरीबी से शुरू हुआ बचपन अनाथालय तक पहुंचा।

ज्योति रेड्डी का जन्म सन 1970 में दक्षिण भारत के तेलंगाना के वारंगल जिले में हुआ था। उनके परिवार में दो वक्त की रोटी तक जुटाने की व्यवस्था करना उनके परिवार के लिए बहुत ही कठिन था। उनके परिवार के सदस्यों में उनके अलावा माता-पिता और 4 बड़ी बहनें थी जिनमें वे सबसे छोटी और सबकी चहेती थी। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब थी जिस वजह से उनकी शिक्षा के बारे मे उनके परिवार के लोग सोचना भी नहीं चाहते थे। चार बच्चो की ज़िम्मेदारी इनके माता-पिता के लिए काफी कष्टदायक था। घर मे खाने की इतनी किल्लत थी की कभी कभी पूरे परिवार को भूखे ही सोना पड़ता था।

ज्योति जी के माता-पिता ने एक कठोर फ़ैसला लेते हुए अपने परिवार की सबसे छोटी बेटी ज्योति जो की उनकी लाड़ली भी थी को अनाथालय भेजने का फ़ैसला लिया। आपको बता दें कि अनाथालय में केवल उन्हीं बच्चों को रखा जाता हैं जिनके माता-पिता की किसी कारण वश मृत्यु हो गई हो। ये नियम ज्योति रेड्डी के अनाथालय का भी था। ज्योति को कभी भी कुछ ना बताने की शर्त पर उनके माता पिता ने मजबूरी मे उन्हे अनाथालय छोड़ दिया ताकि उसकी अच्छी परवरिश व पढ़ाई हो सके। ज्योति अनाथालय में रहते हुए अपनी मां से मिलने के लिए हमेशा के लिए वंचित हो गई थी। उनका यह सफर काफी कठिनाइयों और दुखों से भरा हुआ था। अनाथालय में रहते हुए वे अपनी सुख-दुःख की बात कभी किसी से नहीं कह पाती थी।

Jyothi Reddy success story

16 वर्ष की आयु में हो गया विवाह।

उनकी कठिनाइयों का समय यहीं तक सीमित नहीं रहा बल्कि कम उम्र में ही उनका विवाह उनकी उम्र के दुगुने शख्स के साथ करा दिया गया। उस वक्त उनकी उम्र मात्र 16 वर्ष की ही थी। विवाह हो जाने के 2 वर्ष मे वे 2 बच्चों की मां बन गई थी। उनके परिवार की भी आर्थिक स्थिति कुछ सही नहीं थी। जिस वजह से उन्हें अपने बच्चों की परवरिश करने में काफी कठिनाई होने लगी।

उन्होंने अपनी जिंदगी में शुरू से ही कठिनाइयों और परेशानियों को करीब से देखा था जिसकी वजह से अब उन्हें सबसे अधिक गरीबी से घृणा हो गई थी।

“अपने आम जीवन मे खुली आंखो से वह भी कुछ सपने देखा करती थी, कुछ साधारण और कुछ खास सपनों को वह बुनती थी।
रसोई मे दाल चावल से भरे कुछ डिब्बे साधारण सपनों मे आते थे, ताकि बच्चे भूखे ना सोये यही दुआ कर पाते थे।
खास सपनों मे उनकी इच्छा मात्र साड़ियो तक ही सीमित थी, नयी साड़िया कैसी भी हो पहनने हो वह तरसती थी।”

5 रुपये दहाड़ी पर किया काम।

अपने पारिवारिक स्थिति से जूझते हुए ज्योति ने हिम्मत ना हारते हुए घर से बाहर निकल पैसा कमाने के बारे मे विचार कर लिया। वह अपने आस पड़ोस मे काम की तलाश करने लगी जल्द ही उन्हे अपने घर के पास ही खेतो मे 5 रुपये दहाड़ी पर काम मिल गया। पूरे दिन खेतो पर काम करना पढ़ता था और शाम को मात्र 5 रुपये उन्हे मिलते थे। यह उनकी जरूरत तो पूरी नहीं कर पा रहे थे परंतु कुछ ना मिलने से कुछ मिलना बेहतर

नेहरू युवा केंद्र के साथ जुड़ी ज्योति।

ज्योति का सफर यहीं तक सीमित नहीं था, खेतो पर काम करते हुए एक महिला ने उन्हे नेहरू युवा केंद्र के बारे मे बताया। नेहरू युवा केंद्र, केंद्र सरकार की ओर से गरीब व्यक्तियों को रोजगार व मुफ्त शिक्षा व रोजगार परक शिक्षा देती है। शायद इसी समय का इंतजार था उन्हे, ज्योति ने नेहरू युवा केंद्र की मेम्बरशिप लेकर अपने काम के साथ साथ अपनी शिक्षा को भी वापस शुरू किया। जल्द ही उन्होने टाइपिंग भी सीख ली।

अपने काम के दौरान उन्होंने सन 1992 में अपनी बीए स्नातक की पढ़ाई पूरी की। ज्योति मे अपने घर की आर्थिक हालतों को सुधारने के लिए उन्होने वही गाँव के स्कूल मे पढ़ाना भी शुरू कर दिया। यहाँ उनकी सेलरी 396 रुपये महीने की थी।

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उन्हें अपने घर से स्कूल तक पहुंचने में लगभग 2 घंटे लग जाते थे। स्कूल और घर में आने जाने तक के सफर में लगने वाले 4 घंटें के समय को ज्योति ने सही उपयोग मे लाने के बारे मे सोचा। उन्होने बाजार से कुछ साड़ियाँ खरीदी और उन्हे अपने साथ स्कूल के कर जाने लगी। स्कूल से घर तक के रास्ते मे पड़ने वाले गावों मे वह साड़ियो को बेचने लगी और उन्होने अपने 4 घंटो का भी फ़ायदा कुछ रुपये कमाने मे लगाने लगी।

भविष्य मे आगे बढ्ने के लिए अमेरिका का सफर।

सन 2000 में अध्यापक की नौकरी करते हुए जब ज्योति के अमेरिका से परिचित मिलने आए, तब उन्होंने ज्योति को अमेरिका चलने के लिए कहा जहां बेहतर भविष्य बनाया जा सकता था। ज्योति को उनकी बात सही लगी और अपने जीवन की ऊंची उड़ान के लिए उन्होने अमेरिका जाने के लिए राजी हो गई। उन्होने अपने दोनों बच्चों का दाखिला मिशनरी स्कूल में करने के बाद ज्योति अमेरिका चली गई।

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अमेरिका में आने के बाद वे वहां की चकाचौंध से काफी प्रभावित भी हुई और उन्होने वहां पर कई अलग-अलग तरह की दर्जनो नौकरियां भी की लेकिन इसी बीच में ज्योति को अपने वीज़ा के लिए अक्सर वीज़ा कार्यालय और कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते थे।

अपनी कंपनी खड़ी करने की लिए बिजनेस आइडिया।

जब ज्योति को अपने वीज़ा के काम से वीज़ा कार्यालय और कोर्ट का चक्कर लगाने पड़ रहे थे तब उन्होंने देखा की बाहर से अमेरिका में रह रहे कई लोग वीज़ा बनवाने के लिए मुंह मांगे रुपये देने को भी तैयार थे। Jyothi Reddy success story.
इस प्रकिया को देखने के बाद ज्योति के दिमाग मे एक बिजनेस आइडिया आया, क्यों न अपना खुद का काम शुरू किया जाये। क्योकि ज्योति ने भी वीज़ा कार्यालय और कोर्ट के काफी चक्कर लगाने के बाद काफी कुछ सीख लिया था की कानूनी तरीके से कैसे वीजा बनवाया जाय।

अपने बिजनेस आइडिया पर काम करने के लिए अपने जोड़े हुए करीब 40,000 डॉलर और कुछ इधर-उधर से व्यवस्था करके उन्होंने वीजा कंसल्टिंग के काम की शुरुआत की। समय के साथ धीरे-धीरे ज्योति का वीजा कंसल्टिंग का काम चलने लगा।

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अपने काम को और बढ़ाने के लिए ज्योति ने अपने वीजा कंसल्टिंग के काम के लिए अपना एक सॉफ्टवेयर का निर्माण करवाया। उन्होंने अपनी कंपनी को “Key Software Solutions Inc.” के नाम से रजिस्टर्ड करवाया। उसके बाद उन्होंने अपनी ज़िंदगी में कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
आज ज्योति की कंपनी “Key Software Solutions Inc.” के साथ कई बड़ी-बड़ी कंपनियां जुड़कर उनकी क्लाइंट बनी हुई हैं जिनमे रिलायंस कंपनी भी शामिल है।

ज्योति की कुल सम्पति।

ज्योति ने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर यह साबित कर दिया की कोई जन्म से ही बिजनेसमैन नहीं होता है बल्कि कठिन परिश्रम के बाद ही सफलता मिलती है। आज उनकी सॉफ्टवेयर सलूशन इंक कंपनी की मार्किट वैल्यू लगभग 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानि भारतीय रूपये के मुताबिक करीब 100 करोड़ रूपये से भी अधिक है। आज ज्योति की कुल सम्पति इतनी है कि उनके 6 घर अमेरिका में स्थित है, और कई महंगी सम्पतियां भारत में भी हैं।

किससे मिली प्रेरणा।

उनके मुताबिक भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति स्व. Dr. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम उनके आदर्श थे। वह हमेशा उनके बारे मे पढ़ती थी, उनके जैसा सरल व्यकितत्व अपने जीवन मे अनुसरण करती थी। उन्हे अपना आदर्श मानती थी। अपने इस मुकाम पर पहुंचने के बाद भी वे अपने गरीबी वाले दिनों को याद करती हैं कि कैसे उनको दो वक्त की रोटी नसीब हो पाती थी। वह मानती है की उन्होने अपने बुरे दिनो मे भी कुछ बड़ा करने के बारे मे नहीं सोचती तो शायद यहाँ तक नहीं होती।

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