दोस्तों आज के समय में सफल कौन नहीं होना चाहता है, सभी व्यकित किसी न किसी तरह से सफल होने के लिए कड़ी मेहनत मे लगे रहते है चाहे वो कोई भी आम व्यकित हो या फिर कोई खास। ऐसे ही आम व्यकितों मे से आज हम एक ऐसे चौकीदार की कहानी बताने जा रहे हैं जिन्होंने बहुत ही परेशानियों और कठिनाइयों का सामना करते हुए आज अपनी जिंदगी को सफल बनाया है।

एक चौकीदार की सफलता भरी कहानी।

success story of gaurav kumar जी हां हम बात कर रहे हैं गौरव कुमार की, जिन्होंने अपने जोश जुनून और जज्बे के साथ जुलाई सन 2005 में आईएएस के एक्जाम की तैयारी करने के लिए दिल्ली आए, तब उनके सामने एक अंजान शहर में कई सारी समस्या सामने आ खड़ी हुई लेकिन उन्होने हिम्मत नहीं हारी।

तो चलिए हम बताते है की कैसे गौरव कुमार ने अपनी ज़िंदगी में कड़ी मेहनत कर उसे सफल बनाया।

success story of gaurav kumar
सौजन्य से : Facebook

पारिवारिक स्थिति 

गौरव बताते हैं कि उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। उनके पिता की एक चाय की दुकान थी और उसी से उनके पिता अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में कोई ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था। गौरव उस समय आईएएस की तैयारी कर रहे थे गौरव के पिता ने परिवार की स्थिति को सुधारने के लिए और आईएएस के एग्जाम की अच्छे से तैयारी करने के लिए गौरव को दिल्ली भेजने के बारे में सोचा।

किस तरह की समस्या सामने आई

उन्होने अपने पिता की बात को मानते हुए और परिवार की स्थिति के बारे में सोचकर दिल्ली आने का विचार बनाया। सन 2005 में IAS के एक्जाम की तैयारी करने के लिए दिल्ली आ गए लेकिन दिल्ली आने के बाद उनके सामने खाने-पीने से लेकर रहने तक के लिए छोटी-बड़ी कई सारी समस्याएं आ खड़ी हुई, वह जो रुपये घर से लाये थे वह भी धीरे-धीरे खर्च हो रहे थे, उन्हे रहने के लिए घर भी नहीं मिल रहा था लेकिन उन्होंने जैसे तैसे उन सभी छोटी-बड़ी समस्याओं का सामना करके अपने लिए रहने की जगह के व्यवस्था की और उन्हें एक नवनिर्मित मकान में रहने के लिए जगह मिल गई और वहीं रहकर उन्होने अपनी IAS की तैयारी करने लगे। गौरव ने बताया कि दिल्ली में रहने, खाने-पीने, कोचिंग और पढ़ाई का पूरा का पूरा खर्चा उनके पिता चाय बेचकर किसी तरह से इंतजाम करके निकाला करते थे।

 

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मजबूरी मे परिवार का आया दबाव 

करीब 2 साल बाद उनके परिवार में आर्थिक परेशानी होने लगी। उनके पिता भी बीमार रहने लगे। जिस वजह से उनके पिता अपने बेटे की सभी जरूरत को पूरा कर पाने मे धीरे-धीरे असमर्थ होने लगे थे। हर महीने रुपये सही टाइम पर न मिल पाने की वजह से जब उन्हें अपने घर की स्थिति के बारे में बार बार पूछा तब उनके परिवार वाले उनकी बात को अनसुना करते हुए पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कहते थे और इस तरह से 6 महीने और बीतने के बाद जब उनकी मां ने उन्हें बताया कि उनकी पढ़ाई के लिए घर की पूरी की पूरी जमापूंजी खर्च हो गई जिस वजह से उनके पिता का भी स्वास्थ्य सही नहीं रहता है तब उनकी मां ने उन्हें दिल्ली से वापस अपने घर में आने के लिए कहा।

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कहां पर की नौकरी

वह जानते थे कि जिस तरह से उनकी IAS की तैयारी दिल्ली मे चल रही थी उस तरह से उनकी पढ़ाई घर में नहीं हो पाती क्योंकि घर में और भी कई तरह की परेशानियां जिस वजह से वे अपनी पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पाते। तब उन्होने घर न जाने का निश्चय किया और दिल्ली में ही रहकर अपनी IAS की तैयारी करने के साथ साथ अपने खुद के खर्चे निकालने के लिए नौकरी करने के बारे में सोचा और उन्होने जल्द ही नौकरी के लिए फाइरवाल सिक्यूरिटी कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए गये जहां उन्होने अन्य लोगों के मुक़ाबले अपनी काबिलियत के बलबूते पर सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी मिली जहां उनकी ड्यूटी दिल्ली के जनकपुरी में बैंक के ATM में रात्रि के 10:00 बजे से लेकर प्रात: 6:00 बजे तक के लिए लगी और साथ ही साथ वे अपनी ड्यूटी के साथ साथ पढ़ाई भी करने लगे।

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कभी-कभी ड्यूटी के दौरान उन्हें कई तरह की समस्याओं से सामना करना पड़ा। उन्हें कई बार लोगों के कड़वी बातों को सुनना पड़ता था परन्तु उन्होने अपनी लगन
और विश्वास के साथ उन समस्याओं का सामना करते हुए अपने सपने को हकीकत में तब्दील करने के लिए उन्होने दिन और रात एक कर दिये।
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जीवन में आया सुनहरा मौका

success story of gaurav kumaगौरव के मुताबिक जब उन्होने अपने सपने को सच करने के लिए आईएएस का एक्जाम दिया तो उनका परीक्षा का परिणाम ज्यादा अच्छा नहीं आया तब उन्हें बहुत दुख हुआ और उन्हें केवल दो रास्ते समझ में आये, पहला या तो 3,200/- रूपये की आमदनी वाली सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी करें जो बढ़कर अधिक से अधिक 20,000/- रूपये तक ही हो सकती है या फिर वे ऐसा कोई काम करें जिसमें उनकी आमदनी अच्छी हो सके, तब उन्होने अध्यापक की नौकरी शुरू की क्योकि यही एक ऐसा काम था जो की वह बेहतर तरीके से कर सकते थे। ये उनकी ज़िंदगी के बदलाव का  क्षण था।

बदलाव की राह पर

गौरव ने कई कोचिंग्स मे अपना रेस्यूम दिया और जल्द ही उन्हे एक कोचिंग से सुबह 8 से शाम 8 तक की क्लास लेने के लिए एपाइंट किया और सेलेरी 20,000 रुपये थी। अपनी ज़िंदगी मे अब सिक्यूरिटी गार्ड से बेहतर जॉब को लेना ही उनका उद्देश्य था।

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 पूरे देश में किया अपना नाम

गौरव की एक खशियत सभी को पसंद थी की जब भी वह इंस्टीट्यूट में छात्रो को पढ़ाते थे तो सभी छात्रों को उनके पढ़ाने के तरीके से विषय जल्द ही समझ में आ जाता है जिसकी वजह से उनका नाम जल्द ही पूरे देश में फैल गया और देश के अलग-अलग राज्यों में से बहुत से छात्र और छात्राएं उनसे पढ़ने के आने लगे।

जल्द ही उन्होने दिल्ली के कई बड़े कोचिंग्स मे भी बात की और वहाँ से भी उन्हे 2000 रुपये घंटे के अनुसार क्लास मिलने लगी। गौरव बताते है की उन्होने उस समय करीब 15,18 घंटे क्लास लेते थे और अपनी ज़िंदगी को और बेहतर करने मे लगे हुए थे। वर्तमान समय में आज उनकी कमाई लगभग 3,50,000/- रूपये है।

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गौरव कुमार ने सावित करके बता दिया है एक चाय वाले का बेटा जो कभी बैंक के एक एटीएम में सिक्योरिटी गार्ड के तौर 3,500 रुपये पर काम करता था आज
अपनी मेहनत, लगन और  द्रढ निश्चय से अध्यापक के तौर पर 3,50,000 रुपये महिना कमा रहे है। इससे यही सिद्ध होता है की कोई भी काम छोटा नहीं होता
परंतु अपने उद्देश्य पर लगातार मेहनत करते जाओ सफलता आपको जरूर मिलती है।

 


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