यदि आज के समय में जहाँ हजारो, लाखो रुपयों में मोटी-मोटी सैलेरी में लोगो का आपका घर सही तरीके से नहीं चल पाता तो सोचिये यदि आपकी सैलेरी 10 या 12 हजार रुपये हो तो आप अपने घर को कैसे चला पाएंगे और यदि अलग से आप किसी जरूरतमंद की मदद करना चाहे तो कैसे करेंगे।

अस्पताल में 12,000 महीने तनख्वाह पाने वाले कर्मचारी, गरीबों के लिए बनवा रहे घर। “Zest of Life” की अनोखी पहल।

funding zest of life kerala hospital employees help poor हम सभी जरूरतमंद लोगो की मदद तो करना चाहते है परन्तु हमारी जेब यह करने से मना करती है और दूसरा कारण समय की कमी भी होती है। परन्तु हम आज आप सभी लोगो को ऐसे कुछ लोगो के समूह से रूबरू कराते है जिनकी सैलरी भरे ही कम क्यों न हो परन्तु दिलो में किसी जरूरतमंद की मदद करने की भावना किसी भी तरह से कम नहीं है और ऐसी ही भावना उन सभी के व्यक्तित्व को बदलती है। 

“केरल के थ्रिसुर में स्थित अश्विनी हॉस्पिटल मैं काम करने वाले कर्मचारी जिनकी सैलेरी 12,000 रूपए महीने की आमदनी है और वे अपना घर ठीक से भी नहीं चला पाते। ऐसी स्थिति में उन्होंने एक अनूठे पहल की शुरुवात की।”

“जेस्ट ऑफ़ लाइफ” (Zest of Life)

इस पहल का नाम जेस्ट ऑफ़ लाइफ” (Zest of Life) है। इस मुहिम के अंतर्गत उन सभी कर्मचारियों ने मिलकर अपनी कमाई से थोड़ा थोड़ा पैसे जोड़ कर गरीब आदिवासियों की सभी समस्याओं को कम करने की ठान रखी है। जिसमें से सबसे प्रमुख उनके रहने के लिए घर बनवाना था। जिससे आदिवासियों को मौसम की मार, तरह-तरह की बीमारियां आदि से बचाव हो सके।

इसके अलावा इन सभी गरीब आदिवासियों के डायलिसिस में होने वाला खर्च इस संस्था द्वारा उठाया जाता है। इसके अलावा गरीब आदिवासियों की जिंदगी अच्छे से गुजरे उसके लिए भी इस संस्था के द्वारा हर महीने आवशयकता का सामान उन सभी को दिलवाया जाता है।

“Zest of Life” प्रोग्राम के कॉ ऑर्डिनेटर अनूप जी इस बारे में बताते हुए कहा की, इसकी शुरुआत एक छोटे से काम से हुई थी। परंतु धीरे धीरे इस काम के बारे में जानकर अश्वनी हॉस्पिटल के डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ सब मिलकर अपनी अपनी तरफ से सहायता करने लगे। जो कि सभी के लिए मिसाल बन गई और इस मुहिम में आज काफी लोग जुड़ चुके है और ये करवा आगे बढ़ता ही जा रहा है।

आदिवासीओ की बेसहारा जिंदगी

अश्विनी हॉस्पिटल में इलेक्ट्रीशियन पद पर कार्यरत अनूप ने बताया कि उनका एक पत्रकार दोस्त केरल के थ्रिसुर जंगलों मैं घूमने गया और वहां जाकर देखा कि वहां के आदिवासी टूटे-फूटे झोपड़िंया और शीट्स से बने घरों में मुश्किल से रह पाते हैं। इसके साथ ही वे तरह-तरह की बीमारियां और मौसम की मार भी झेलते हैं।

बरसातों के दिनों में आदिवासी समाज अपने परिवार जिनमे छोटे बच्चे भी है सभी को बारिश से बचने के लिए कही और ले जाते है और ऐसे ही जंगलो में भटकते रहते है। आदिवासियों की इस स्थिति के बारे में किसी को भी नहीं पता था इसलिए उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ बातचीत कर वहां जाकर देखा, जहां आदिवासी बड़ी मुश्किल से अपना जीवन यापन कर रहे थे।

आदिवासी की दयनीय स्थिति को देखकर अनूप और उसके हॉस्पिटल में काम करने वाले सहयोगिओं ने अपनी-अपनी कमाई से थोड़ा थोड़ा पैसा एकत्रित कर 2 महीने के अंदर ही आदिवासियों के रहने के लिए घर बना कर दिया। जिसकी लगत तक़रीबन डेढ़ लाख आई।

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इसके बाद तो इस करवा में अधिकांश लोग जुड़ने लगे। यही से इस पहल की शुरुवात हुई और इस पहल को संस्था का रूप देकर इसका नाम “Zest of Life” रखा। हर किसी ने अपनी अपनी सामर्थ्य अनुसार मदद की। मिली जानकारी से अब तक इस संस्था के द्वारा इकट्ठा हुए रुपयों से 65 डायलिसिस का खर्च उठा चुके है।

Zest of Life
Zest of Life

मदद के लिए उठते हाथ।

ऐसे ही और भी आदिवासीओ की मदद के लिए “Zest of Life” संस्था में स्वेछा से चंदे के द्वारा रूपये जुड़ रहे है। जिसके द्वारा इकठा हुए रुपयों से जरूरतमंद आदिवासीओ की मदद की जाती है। इस मुहीम में डॉक्टर से नर्स और इलेक्ट्रीशियन से लेकर एडमिनिस्ट्रेशन स्टाफ तक सभी लोग मदद करते है।

इस संस्था में 35 एक्टिव मेंबर है। हालाँकि एंप्लॉई एसोसिएशन मैं 800 सदस्य हैं। परन्तु ये 35 कर्मचारी ही सक्रिय रूप से इस संस्था के काम को करते है। और सभी मेम्बरो की तरफ से बाहरी रूप से मदद मिलती रहती है।अश्वनी हॉस्पिटल में 16 सालो से अटेंडेंट का काम करने वाले लियो नामक कर्मचारी ने बताया की इस हॉस्पिटल में सभी डॉक्टर और कर्मचारी एक साथ नेक काम करते हुए पहली बार नजर आए।

सभी आदिवासीओ का जीवन सुखमय।

हर महीने कम सैलेरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए किसी की मदद करना मुमकिन नहीं हो पता है परन्तु यदि सभी लोग एक साथ मिलकर थोड़ी थोड़ी मदद करे तो हर नामुमकिन काम मुमकिन हो सकता है। और ऐसा अश्विनी हॉस्पिटल में देखने को मिलता है सभी के द्वारा सामर्थ के अनुसार मदद के चलते आज केरल के सभी आदिवासीओ को शायद ही कोई समस्या हो और उनका जीवन सुखमय हो।

हर व्यक्ति जरूरतमंद की मदद करना चाहता है यदि आप भी एकता की ताकत को अपनाओ तो शायद ही केरल की तरह हर राज्य में कितने ही गरीबो की मदद हो पायेगी और किसी की मदद से जो संतुष्टि मिलती है वह आप को पूरी जिंदगी कही और किसी भी चीज़ में नहीं मिल सकती है।

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